इसके बारे में ज़्यादा कुछ कहने लायक नहीं, मुझे बस ये एनालॉजी मज़ेदार लगी। मुझे लगता है कि 2026 में, लोगों को ये यक़ीन दिलाना कि जो मेरे साथ हो रहा है, और सिर्फ़ मेरे साथ नहीं बल्कि हज़ारों-हज़ार लोगों के साथ, वो मेरे दिमाग की बनाई हुई चीज़ नहीं है, सच में बहुत मुश्किल है।
इसमें सच में बहुत बारीकी से आगे बढ़ना पड़ता है, रोज़मर्रा की ज़िंदगी, काम, दोस्त, अपने लोग, मेरी बीवी और साथ ही फ़िनॉमिनन के लोगों के साथ अपने रिश्ते को भी संभालना पड़ता है।












